Sharvari Story Part 2 - The First Meet Ever
शर्वरी की कहानी का दूसरा हिस्सा...
शर्वरी के गुजरते दिनों में शरुआत थी किसी बड़े chapter की। वैसे कितनी ताजूब की बात है की कहानी चाहे अपनी हो या दुसरो की मजा सुनने में जितना आता है उतना उसे जीने में नहीं क्यों ?
छोड़िये ये बेतुकी बातें आगे बढ़ते है...
वैसे तो शर्वरी ने अपनी ज़िंदगी के हर पल को जिया है। नई जॉब पर शरुआती कुछ दिन अच्छे थे थोड़ी बहुत एडजस्टमेंट के साथ...अपनी मनपसंद फील्ड में काम करने का मौका मिला था। वैसे तो यह 'लॉ ऑफ़ अट्रैक्शन' तब तो पता नहीं था उसे लेकिन जान जाएगी।
वहां उसकी मुलाकात उसके पहले और maybe आखरी प्यार से हुई। नाम...सुनना जरूर पसंद करेंगे। शर्वरी का सबसे मनपसंद नाम "विवान" | विवान ने पहली बार उसे उस वक्त देखा जब वो पहली बार उसकी अनचाही फ्रेंड के साथ आयी। विवान को वो पहली नज़र में पसंद आयी और शर्वरी को भी शायद। लेकिन कहते है न सच्चा प्यार कहा आसानी से होता है। वो ऑफिस देखकर चली गयी। विवान उसे देखता रही गया। खास बात तो यह है की दोनों दे बाद में सोचा तो सही और सोचा भी यही की शायद अट्रैक्शन है। जिनके सोच मिलती है क्या उनके दिल भी मिल पाएंगे ?
कैसे भी कर के विवान अपने दोस्त और शर्वरी की अनचाही दोस्त के ज़रिये शर्वरी को भी जोबी पे रख लिया। शर्वरी की दूसरी जॉब शरू हो गयी। दिन गुजरने लगे। शर्वरी और विवान ने अभी एकदूसरे को पूरी तरह से देखा भी नहीं थे क्योकि जब भी मिलते या बात होती तो सामने देखना बहुत ही कम होता था। ऐसे तकरीबन एक महीना गुज़रा। एक दिन शर्वरी जब काम कर रही थी उसके बिलकुल पीछे थोड़ी आवाज़ हुई जैसे कोई जोर से गिरा। असल में शर्वरी जहाँ काम करती उस केबिन में सोना बैठने के लिए एक सोफे जैसा था। उस दिन विवान अचानक आकर वहां पर सो गए शर्वरी को पता भी न चला। उसने मूड के देखा और फिर अपने काम पे लग गयी। थोड़ी देर बाद उसे ख्याल आया " थोड़ा ध्यान से एक बार देखती हु विवान को।" वो धीरे से बिना आवाज किये खड़ी हुयी और बड़े ही इत्मीनान से उसे देखने लगी। वो उसे देखती ही रही...होश आनेपर धीरे से बिना आवाज किये वापस अपनी जगह पर बैठ गयी। वो पूरा दिन उसके बारे में सोचती रह गयी। लेकिन अभी दोनों को यही था की यह अट्रैक्शन है, कुछ खास नहीं है।
अब क्या करे जनाब, प्यार है अहसास होने में देर लगनी ही थी क्योंकि... छोड़िये। तकरीबन १ महीने बाद ऑफिस शिफ्ट हुई और पहली बार शर्वरी और विवान ने ऐसे बात की जैसे दोनों बहुत अच्छे दोस्त हो। शर्वरी विवान की मदद से जैसे तैसे अपनी नए ऑफिस पहोची। दोनों साथ में अंदर गए। ऑफिस फर्स्ट फ्लोर पे थी। दोनों ने मिलकर सारा बाकि का सेटअप भी कर दिया। और जानते हो यह ऑफिस इसलिए शिफ्ट हुई थी क्योंकि पुराणी जगह पे २ से जयादा लोग बैठ कर काम नहीं कर सकते थे। और वैसे भी शर्वरी के साथ उसकी अनचाही दोस्त ने भी तो वही जो ली थी।
दोनों सारा सेटअप कर के बात कर ही रहे थे की उसकी अनचाही दोस्त अपने पहले दिन आ गयी। और फिर तो क्या कहु जनाब...
एक बात इस हिस्से से समज में आ गयी की शर्वरी की लाख कोशिश के बावजूद उसे वहां जॉब करनी पड़ी। उन दोनों की इतनी दूरी के बावजूद दोनों अंत में मिल जाते। यह किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं था। क्योंकि दोनों ने मन में कुछ होता था लेकिन मिट भी जाता था। कुछ था जो विवान को रोक रहा था। कुछ ऐसा भी था जो शर्वरी की इच्छा के बिना भी उसे उसकी और खींच रहा था।
दोनों जैसे कोई अल्बाट्रोस के जोड़े की तरह थे चाहे कही भी हो मिल ही जाते। दोनों के मन बिलकुल अल्बाट्रोस की तरह चंचल। दोनों को एकसाथ देखके ऐसा लगता था जैसे दोनों में कोई चुंबक जैसा खिंचाव हो।
चलिए आगे की कहानी अगले हिस्से में... मिलते है।
अगर आपको यह हिस्सा पसंद आये तो प्लीज शेयर जरूर कीजियेगा। इस मुख़्तसर मुलाकात के लिए शुक्रिया।
Bahut achhe
ReplyDeleteGreate 👍👍👍👍